मनुष्यों में बीमारी के बहुत सारे कारण है जिसमे सबसे प्रमुख कारन ३ है.
- वात
- पित
- काफ
वातआज के माडर्न ज़माने में आदमी अकेला होते जा रहा है। किसी के पास दुसरे के लिए समय नही है जिससे आदमी अकेलापण महसूस करता है। जिससे उसे मानसिक डिप्रेशन होता है। इसके शिकार समाज के हर वर्ग है, पर बच्चे और बुजुर्ग सबसे जयादा ग्रसित है।
इसका निदान - परनायम, अच्चुप्रेस्सुरे, रंग चिकित्सा, होमेओप्ति चिकित्सा है ये लोगो पर निर्भर खरता है की वे किस चिकित्सा पद्दति का इस्तेमाल करते है। चुकी बच्चे (०-५) जयादा अच्छी तरह से परनाय्म नही कर सकते इसीलिए होमेओप्ति चिकित्सा उनके लिए जयादा लाभकरी है।
पितसरीर में पित की गर्बरी से बहुत साडी बीमारी होती है। इसके प्रमुख कारण खानापण में गर्बरी है। चुकी आज मनुष्य फास्ट फ़ूड की तरफ़ जयादा इंटेरेस्ट रखते है और ठोश भोजन जैसे दाल, हरी सब्जी, चावल वैगेरह कम खाते है जिसके कारण उनके पाचन तंत्र गर्बर जातां है जिस्से सरीर में पित असंतुलित हो जाता है और मनुष्य बीमार परता है।
इसका निदान - - सही समय पर खाना
- उचित मात्रा में आहार का सेवन
- पौष्टिक भोजन - जैसे हरी सब्जी, दाल चावल आदि।
कफकफ के गरबरी से मनुष्यों में रोग से लड़ने की आन्तरिक सकती कम हो जाती है.
इसके निदान - प्राणायम करने सेरोग प्रथिरोधाक छमता बरती है।
प्रनामय्म सिखने के लिए आस्था चैनल में सुबह राम देव बाबा का कार्यकर्म देख सकते है। बच्चो (०-७) के बीमारियों के लिए इलेक्ट्रो होमोपथ चिकित्सा या होमोपथ बहुत अच्छा है जिसका रिजल्ट बहुत अच्छा है और कोई साइड इफेक्ट भी नही होता है।