Sunday, December 21, 2008

आप अपनी प्रकृति कैसे जान सकते है.

इस संसार में मुख्य रूप से पाच (५) प्रक्रति के लोंग होते है. मनुष्य की पृकृति उसके सरीर स्वभाव रहन-सहन, खान-पान आदि से जानी जा सकती है। हामरी पूर्वज भी कहा करते थे की जैसा मनुष्य का खान-पान होता है वैसे ही मनुष्य की प्रकृति होती है। मनुष्य को बार बार होने वाली बीमारी से भी मनुष्य की प्रकृति मिश्रित जा सकती है

पाच प्रक्रति इस प्रकार है
  1. कफ प्रक्रति (lymphatic temperament)
  2. रक्त प्रक्रति (sanguine temperament)
  3. वात प्रक्रति (Nervous temperament)
  4. पित प्रक्रति (Billious temperament)

  5. मिश्रित प्रकृति (Mixed temerament)
प्रकृति जानने का तरीका

कफ प्रकृति

इस प्रकृति के मनुष्य में नाड़ी की धरकन तर्जनी (४) अंगुली में अधिक मालूम होती है।

रक्त प्रकृति
इस प्राकृत में मनुष्य की नाडी की धरकन तीनो अंगुलियों में सामान होती है।

वात प्रकृति
इसमे नाड़ी की धरकन रिंग फिंगर में अधिक मालूम पड़ती है।

पित प्रकृति
इसमे नाड़ी की धरकन बिच वाली अंगुली में अधिक मालूम होती है।

मिश्रित प्रकृति
जब नाड़ी की धरकन किसी दो अंगुलियों में अधिक मालूम पड़े तो वह मिश्रित प्रकृति वाला होता है।



मनुष्य में बीमारी के प्रमुख कारन

मनुष्यों में बीमारी के बहुत सारे कारण है जिसमे सबसे प्रमुख कारन ३ है.

  1. वात
  2. पित
  3. काफ
वात

आज के माडर्न ज़माने में आदमी अकेला होते जा रहा है। किसी के पास दुसरे के लिए समय नही है जिससे आदमी अकेलापण महसूस करता है। जिससे उसे मानसिक डिप्रेशन होता है। इसके शिकार समाज के हर वर्ग है, पर बच्चे और बुजुर्ग सबसे जयादा ग्रसित है।

इसका निदान - परनायम, अच्चुप्रेस्सुरे, रंग चिकित्सा, होमेओप्ति चिकित्सा है ये लोगो पर निर्भर खरता है की वे किस चिकित्सा पद्दति का इस्तेमाल करते है। चुकी बच्चे (०-५) जयादा अच्छी तरह से परनाय्म नही कर सकते इसीलिए होमेओप्ति चिकित्सा उनके लिए जयादा लाभकरी है।

पित
सरीर में पित की गर्बरी से बहुत साडी बीमारी होती है। इसके प्रमुख कारण खानापण में गर्बरी है। चुकी आज मनुष्य फास्ट फ़ूड की तरफ़ जयादा इंटेरेस्ट रखते है और ठोश भोजन जैसे दाल, हरी सब्जी, चावल वैगेरह कम खाते है जिसके कारण उनके पाचन तंत्र गर्बर जातां है जिस्से सरीर में पित असंतुलित हो जाता है और मनुष्य बीमार परता है।

इसका निदान -
  1. सही समय पर खाना
  2. उचित मात्रा में आहार का सेवन
  3. पौष्टिक भोजन - जैसे हरी सब्जी, दाल चावल आदि।
कफ
कफ के गरबरी से मनुष्यों में रोग से लड़ने की आन्तरिक सकती कम हो जाती है.

इसके निदान - प्राणायम करने सेरोग प्रथिरोधाक छमता बरती है।

प्रनामय्म सिखने के लिए आस्था चैनल में सुबह राम देव बाबा का कार्यकर्म देख सकते है। बच्चो (०-७) के बीमारियों के लिए इलेक्ट्रो होमोपथ चिकित्सा या होमोपथ बहुत अच्छा है जिसका रिजल्ट बहुत अच्छा है और कोई साइड इफेक्ट भी नही होता है।

Sunday, November 9, 2008

About Me

I am Dr. Sunita Narayan. I am a professional doctor of Electro Homeopathy and is practicing Electro Homeopathy since 2003. Apart from Electro Homepathy, I also know Colorpathy, Accupressure, and Yoga (I am follower of Swami Ramdeo).

I live in Hyderabad.